Lata Mangeshkar
Om Jai Jagdish Hare (Aarti)
[Intro]
ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे

[Verse 1]
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का
स्वामी दुःख बिनसे मन का
सुख सम्पति घर आवे
सुख सम्पति घर आवे
कष्ट मिटे तन का

[Chorus]
ॐ जय जगदीश हरे

[Verse 2]
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा
तुम बिन और न दूजा
आस करूं मैं जिसकी

[Chorus]
ॐ जय जगदीश हरे
[Verse 3]
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी
स्वामी तुम अन्तर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर
पारब्रह्म परमेश्वर
तुम सब के स्वामी

[Chorus]
ॐ जय जगदीश हरे

[Verse 4]
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता
स्वामी तुम पालनकर्ता
मैं मूरख फलकामी
मैं सेवक तुम स्वामी
कृपा करो भर्ता

[Chorus]
ॐ जय जगदीश हरे

[Verse 5]
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति
स्वामी सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं गोसाई
किस विधि मिलूं गोसाई
तुमको मैं कुमति
[Chorus]
ॐ जय जगदीश हरे

[Verse 6]
दीन-बन्धु दुःख-हर्ता, ठाकुर तुम मेरे
स्वामी ठाकुर तुम मेरे
अपने हाथ बढ़ाओ
अपने हाथ बढ़ाओ
द्वार पड़ो तेरे

[Chorus]
ॐ जय जगदीश हरे

[Verse 7]
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा
स्वमी पाप हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
सन्तन की सेवा

[Chorus]
ॐ जय जगदीश हरे

[Outro]
जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे