Shaan
Aksar

अक्सर क्यूँ यूं लगे के तुम कोई और हो
हम तुम जहां थे मिले वो गुज़रा हुआ दौर हो
अक्सर फिर यूं लगे के तुम मेरी जान हो
तुमसे मेरी ज़िंदगी, तुम ही मेरी पहचान हो

अक्सर
दिल ही दिल अक्सर
हाँ... तुम्हे सोचकर
दिल ही दिल अक्सर

अक्सर दिल को है गिला कि तुमसे मुझे क्या मिला
मेरी ज़िंदगी मेरे प्यार का तुमने दिया क्या सिला
फिर कभी जब करीब से मैं खुद को देखलूँ अगर
दिल के आईने में बस तुम ही तुम आओगी नज़र

अक्सर
दिल ही दिल अक्सर
हाँ... तुम्हे सोचकर
दिल ही दिल अक्सर

अक्सर एक सवाल सा मेरे ज़हन में उठे
हम तुम अगर बिछड़ गए, होंगे कैसे सिलसिले
घबराके इस खयाल से मैं तुमसे फिर लिपट गया
तुम हो तो मैं भी हूँ, अब तुमसे मैं जाऊँ कहाँ?

तुमसे जाऊँ मैं कहाँ?
तुम्हे सोचकर
दिल ही दिल अक्सर
अक्सर
दिल ही दिल अक्सर
हाँ... तुम्हे सोचकर
दिल ही दिल अक्सर
ला ला हे हे हे हे हे
तुम्हे सोचकर
दिल ही दिल अक्सर